गर तुम्हे लगे की अजीज नही में तो मत बैठाना अपनी सुनहरी साईकिल पर मुझे धीरे धीरे ही सही पहुँच ही जाऊंगा मै अपने गाँव जहाँ उसी बरगद के नीचे बैठकर शायद हम फिर बातें करें उन सुनहरी जड़ों की जो अब भी सिखाती हैं नीचे झुक कर फिर से एक नए सिरे की शुरुआत करना...