Friday, June 19, 2009

गुजरते वक़्त की निगाहों से

गुजरते वक़्त के
हर पल की निगाहों से
मेने तुम्हे अनवरत परिवर्तनों के बीच
हमेशा महसूस किया है
में चाहता हूँ
तुम्हे अपने रंगों में ढालू
तुम्हारी तस्वीर को
में अपने रंगों से ढालना चाहूँगा
अगर तुम
वक़्त को पीछे धकेल कर
मेरे रंगों को समझ सको
हर चीज़ को
मैंने अपने रंगों मैं ढाला हैं
चाँद, तारे, फूल सभी कुछ
मगर
इक तस्वीर अभी भी अधूरी है
बिना उस रंग के
जिसे वक़्त ने धुंधला कर दिया है
इसलिए
तुम्हे वक़्त को धकेलना होगा
बहुत पीछे
इतना... जितना मैंने महसूस किया है
तुम्हारे बिना,
वहां तक जहाँ तक
हमने तुमने मिलकर
कुछ नए रंग बनाये थे
अपनी तस्वीर के..

1 comment:

  1. वो रंग मिले तो हमें भी बताना
    हम भी उस रंग से रूबरू होना चाहेंगे
    जो रंग चाँद, तारों, और फूलों में नहीं
    उस रंग में हम भी डूबना चाहेंगे

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