Thursday, October 22, 2009

गर तुम्हे लगे की
अजीज नही में
तो मत बैठाना
अपनी सुनहरी साईकिल पर मुझे
धीरे धीरे ही सही
पहुँच ही जाऊंगा मै अपने गाँव
जहाँ उसी बरगद के नीचे
बैठकर
शायद
हम फिर बातें करें उन सुनहरी जड़ों की
जो अब भी सिखाती हैं
नीचे झुक कर
फिर से एक नए सिरे की शुरुआत करना...

Saturday, July 18, 2009

चलो इस मौसम में

चलो इस मौसम में
बादलों को छूने चलें हम
ठंडी हवा के तेज़ झोंको में
कटी पतंग से उड़ने चले हम
यूँ तो हम तुम में हैं फांसले बहुत
चलो आँखें बंद करो
यूही कही दूर निकल चलें हम

Friday, June 19, 2009

गुजरते वक़्त की निगाहों से

गुजरते वक़्त के
हर पल की निगाहों से
मेने तुम्हे अनवरत परिवर्तनों के बीच
हमेशा महसूस किया है
में चाहता हूँ
तुम्हे अपने रंगों में ढालू
तुम्हारी तस्वीर को
में अपने रंगों से ढालना चाहूँगा
अगर तुम
वक़्त को पीछे धकेल कर
मेरे रंगों को समझ सको
हर चीज़ को
मैंने अपने रंगों मैं ढाला हैं
चाँद, तारे, फूल सभी कुछ
मगर
इक तस्वीर अभी भी अधूरी है
बिना उस रंग के
जिसे वक़्त ने धुंधला कर दिया है
इसलिए
तुम्हे वक़्त को धकेलना होगा
बहुत पीछे
इतना... जितना मैंने महसूस किया है
तुम्हारे बिना,
वहां तक जहाँ तक
हमने तुमने मिलकर
कुछ नए रंग बनाये थे
अपनी तस्वीर के..

Saturday, June 6, 2009